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नहि जयबाक चाही ओहि शहरमे

nahi jaybak chahi ohi shaharme

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

नहि जयबाक चाही ओहि शहरमे

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    नहि जयबाक चाही

    ओहि शहरमे वापस

    जतय बीतल अछि

    अहाँक नेनपन...

    कतेक हुलसिक' गेल रहि

    'चकिया'

    चकिया, जे छल हमर जन्मभूमि

    कर्मभूमि सेहो

    एहि शहरक

    एक-एक बीत नापल अछि डेगसँ

    कहाँ छल अनचिन्हार एक्कहुटा स्थान

    महिन्द्राक चाहक दोकान, नेंगराक पानक दोकान

    बिफे बजार, केसरिया रोड, मन चौक आकि धर्मशाला

    सभक स्मृति एलबममे लागल चित्र सन अछि ताजा

    मुदा आइ

    स्टेशनसँ बाहर निकलिते

    अनभुआर सन लागल

    अपन डेरा दिस जाइबला रस्ता

    ढहि-ढनमना गेल छैक रजिस्ट्री ऑफिस

    समतल मैदान भ' गेल छैक चीनी मिल परिसर

    कुतुबमिनारक प्रतिकृति मिलक चिमनी

    ताकि रहल छल हमर आँखि

    बड़का शीशोक गाछ

    सेहो नहि छैक आब मन चौक पर

    अरे!

    नीमक गाछ सेहो काटि देल गेल अछि

    जे रहैक हमरा जन्मोसँ पहिनेसँ

    हमारा डेराक सामने

    परिचिति रहैक कहिओ नीमक गाछ

    —'झाजी सुपरवाइजर साहेब के डेरा केने बा हो?’

    —'मन चौक पर, नीम के गाछ तर'

    कानमे अभरि रहल अछि एखनो धरि

    काश्तकार सभक बतकही

    की कहू भाय

    लागि गेल अछि ठकमूड़ी

    अतीत जेना चलय लागल नजरिक सोझाँ

    चलचित्र जकाँ

    नहि जयबाक चाही

    ओहि शहरमे वापस

    जतय बीतल अछि

    अहाँक नेनपन

    अहाँक स्मृति सन

    आब ओतय

    किछु नहि छैक बाँचल!

    स्रोत :
    • पुस्तक : नो मेन्स लैण्ड पर ठाढ़ कवि (पृष्ठ 34)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2024

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