बिस्तर के बग़ल में
bistar ke baghal mein
रोचक तथ्य
बेडसाइड रीडिंग, शीर्षक कविता में कवयित्री मेरिलियन नेल्सन ने महानतम भौतिक विज्ञानी अल्बर्ट आइंस्टीन के समकालीन, 20वीं सदी के सर्वाधिक प्रसिद्ध अश्वेत वैज्ञानिक, जॉर्ज वॉशिंग्टन कर्वर, की गतिविधियों को दर्ज करते हुए प्राकृतिक सौंदर्य में उनकी अभिरुचि, वैज्ञानिक संवेदना और धार्मिकता के बीच के घनिष्ठ संबंध को दर्शाने की कोशिश की है। अपने काव्य-संग्रह, ‘कर्वर : ए लाइफ़ इन पोएम्स’ में मेरिलियन नेल्सन ने डॉ. कर्वर की जीवनी को कविताओं के माध्यम से पाठकों के बीच में लाने का काम किया है।
(सेंट मार्क एपिस्कोपल के लिए, गुड फ़्राइडे 1999)
बिस्तर के साथ लगती डॉ. कर्वर की मेज़ पर
उनकी जेबघड़ी के नज़दीक,
सूखे पत्ते,
बीज समेत मिट्टी के नमूने,
स्फटिक के कंकड़,
ख़ुद को संबोधित नोट्स,
पत्र,
मारिया चाची की बाइबिल के भीतर,
मैरी नामक तेरह वर्ष की बच्ची को
सात सौ डॉलर की क़ीमत पर ग़ुलाम के रूप में बेचे जाने की
तह करके रखी गई रसीद,
सभी चीज़ें सावधानी से रखी हुई हैं
डॉ. कर्वर इन सबको
एक जगह से दूसरी जगह पर बदलते रहते हैं,
पंद्रह सेंट प्रतिदिन से मैरी अपना गुज़ारा करती थी
तीन सौ पचास डॉलर सभी बेटों के लिए,
मृत पैदा हुई दो बेटियाँ,
जिन्हें कर्वर्स के बच्चे लिखकर दफ़नाया गया है,
के लिए कोई राशि नहीं
यदि कर्वर को अपना चश्मा साफ़ करना याद रहता है
तो इस तेज़ रोशनी में उनकी शाम की पढ़ाई काफ़ी आसान हो जाती है,
वे इब्राहिम की फलती-फूलती, हैरान करने वाली,
इसाक के अपने पिता की बुद्धि पर पूरे भरोसे की
कहानी की तरफ़ मुड़ते हैं
मैरी की पूरी ज़िंदगी के एवज़ में सात सौ डॉलर!
वे सिर हिलाते हैं
घने जंगल में जब भेड़ा मिमियाता है,
इसाक1…मेरी तरह…केवल उन्हीं चीज़ों को समझ पाता है
हमेशा से आप सदा विश्वास कर सकते हो,
वे चीज़ें हैं,
प्राकृतिक व्यवस्था…
और ईश्वर का प्रेम
डॉ. कर्वर ने पन्ने को सही किया
और
अपनी माँ से मिलाने वाली एकमात्र निशानी
वाली पुस्तक बंद कर दी
उन्होंने अपने चश्मे की डंडियों को मोड़ा
और एक पल भर के लिए अपना सिर झुकाया
बाइबिल को मेज़ पर रखा जिसे रखना पहले वह भूल गए थे
और रोशनी की तरफ़ हाँफे
फिर वह लेटकर सपना देखने लगे
जैसे बिजली का लट्टू ठंडा हो रहा हो
- पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
- संपादक : अविनाश मिश्र
- रचनाकार : मेरिलियन नेल्सन
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.