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साँच बात बोले में

saanch baat bole mein

कृष्णानन्द कृष्ण

कृष्णानन्द कृष्ण

साँच बात बोले में

कृष्णानन्द कृष्ण

और अधिककृष्णानन्द कृष्ण

    साँच बात बोले में भइया डर काहे के

    बाकी ओकर धाहे देखीं सब जर जाला

    आइल समय चलीं अब सबके मन थाहे के

    खाली पाँव चले मनई छाला पर जाला।

    कतनो अमरित कुंड नहाई कुछ ना होई

    जबले आपन मनवाँ शुद्ध होई भाई

    झूठ बोल के काहे केहू आपा खोई

    हाथ हासिल होई कतनो रोई-गाई।

    ऊपरवाला के माया सब बाटे भाई

    अपना भीतर का शिवत्व के अब जागे दीं

    अपना अनकर के दूरी के पार्टी खाई

    अंधकार सब मन के भीतर के भागे दीं

    कइसन नाच नचावे बिधना देखीं खेला

    खुश होलन जेपर सहजे मुकुती पा लेला।

    स्रोत :
    • पुस्तक : आपन गाँव भेंटाते नइखे (पृष्ठ 54)
    • रचनाकार : कृष्णानन्द कृष्ण
    • प्रकाशन : पुनः प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 2012

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