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अपनी गति करो परिपूर्ण

apni gati karo paripurn

श्री अरविंद

श्री अरविंद

अपनी गति करो परिपूर्ण

श्री अरविंद
मेरे भीतर अपनी गति करो परिपूर्ण, 
हे अधिनायक मन 
मस्तिष्क की धूसरता, विद्युत का दीप्त स्फुरण, 
प्रतिभाशाली और विवेकशून्य, 
इन्हें तुम करते संयुक्त, संरचित करने के लिए संसार, 
स्वर्णिम नामावली में लिखते हुए विचार 
नीललोहित-रेखामय।

अपने लेखन के लिए बनाया तुमने मस्तिष्क को फलक, 
दिव्य अधिनायक! 
प्रशांति से तुम लिखते हो या अपनी भव्यता से परिपूर्ण 
जैसे हो मदिरा की चमक से अरुण, 
तब हँसकर तुम नामावली का करते अपमार्जन, 
ले आते दूसरी, उन तरंगों के सदृश जो करतीं लुंण्ठन
और हो जातीं चित निमग्न।
स्रोत :
  • पुस्तक : श्री अरविंद | चुनिंदा कविताएँ (पृष्ठ 115)
  • रचनाकार : श्री अरविंद
  • प्रकाशन : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत
  • संस्करण : 2020
हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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