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हमसभ विराजित छी जतऽ एहि

hamsabh virajit chhi jatऽ ehi

बाबा बैधनाथ

बाबा बैधनाथ

हमसभ विराजित छी जतऽ एहि

बाबा बैधनाथ

और अधिकबाबा बैधनाथ

    हमसभ विराजित छी जतऽ एहि जगह केर बड़ नाम छै

    एतऽ काव्य-गंगा बहैत छै सभ तीर्थ तेँ एहि ठाम छै

    प्रेम-आराधक एतऽ सभ ज्ञानकेर सभ पारखी

    एहिठाँ रहैछ लक्ष्मी सदा सरस्वतीकेर धाम छै

    भीड़ जे उमड़ल एतऽ—जन-जागृतिक संकेत थिक

    माँ-मैथिलीक सौभाग्य जे विधि भेल दहिन, ने बाम छै

    मोनमे दबल जे बात हो सभ मिलि एतऽ बाहर करू

    दिल खोलि गप्प कऽ ली एतऽ सरस लोकक गाम छै

    होयत हमर सौभाग्य जँ तँ भेँट पुनि होयबे करत

    नहि तँ बुझू जे आखिरी सभकेँ हमर प्रणाम छै

    स्रोत :
    • पुस्तक : पहरा इमानपर (मैथिली गजल-संग्रह) (पृष्ठ 11)
    • रचनाकार : बाबा बैधनाथ
    • प्रकाशन : गौरी प्रकाशन, कचहरी बलुआ, पूर्णिया
    • संस्करण : 1989

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