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जानि अहाँ करबे की?

jani ahan karbe kee?

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

जानि अहाँ करबे की?

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

और अधिकसुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

    हमर घाव हमरे अछि, जानि अहाँ करबे की?

    दर्द बड़े जोरक, अनुमानि अहाँ करबे की?

    पिपनीपरक नाच अपन अपने टा देखने रही,

    कोँढ़क ऐँठनकेँ छानि अहाँ करबे की?

    हाथक जे मोती छल अनचोके हेरा गेल,

    केहन बेपानि भेलहुँ, पानि अहाँ करबे की?

    भितरक कोलाहलसँ उजगुज मोन व्यथित,

    धारक ओहि पार प्राण, फानि अहाँ करबे की?

    भोरक चान केहन, लागय अन्हार जकाँ,

    सुरुजक इजोतकेँ दफानि अहाँ करबे की?

    देखल अछि सूनल अछि, सभ कथूक सीमा छै,

    जिनगी असीमतम उबानि, अहाँ करबे की?

    बौआयल कते छी, बौआयब आर बाँकी अछि,

    बाटे जँ अन्त होअय, कानि अहाँ करबे की?

    स्रोत :
    • पुस्तक : गजल ओ गीत
    • रचनाकार : शेखर प्रकाशन, पटना
    • प्रकाशन : सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी
    • संस्करण : 1991

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