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नोर विवशता नहि थिक लपकैत आगि थिक नोर,

एक दिन बरिसैत अछि एक दिन धधकैत अछि नोर

नोर करुणा नहि, उपजैत आक्रोशक चिनगी थिक,

गामक गाम नगरक नगर डाहैत अछि नोर

नोर वात्सल्यक, सिनेहक नहि थिक अभिव्यक्ति,

जमा भऽ कऽ संसारकेँ भसिया दैत अछि नोर

बुन्द बुन्दकऽ जे चुबैत अछि से नाटक थिक टाटक थिक,

संसारकेँ उनटबैत आयल अछि बान्हल नोर

अबल नहि जे अबलाक आँखिसँ झहरैत अछि,

अपन शक्ति देखा कऽ जे रहैत अछि से थिक नोर

झांसीवालीक नोरमे ढाल तरुआरि होइत अछि,

भीतरसँ जे कसमस करैत अछि से थिक नोर

नोर युवकक बेकारी मजूरक बैसारी नहि थिक

किछु करबा ले भिड़ि जाइत अछि लड़ि जाइत अछि नोर

स्रोत :
  • पुस्तक : गजल ओ गीत
  • रचनाकार : शेखर प्रकाशन, पटना
  • प्रकाशन : सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी
  • संस्करण : 1991

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