बिसरि जे गेल, तकर मूँह मोन पाड़ै छी
bisari je gel, takar moonh mon paDai chhi
मायानंद मिश्र
Mayanand Mishra
बिसरि जे गेल, तकर मूँह मोन पाड़ै छी
bisari je gel, takar moonh mon paDai chhi
Mayanand Mishra
मायानंद मिश्र
और अधिकमायानंद मिश्र
बिसरि जे गेल, तकर मूँह मोन पाड़ै छी
दिनुक इजोतमे रातुक खड़ी उचारै छी
कतेक यौवनक अपन रंगल कथा होइछ
एतेक लोकमे गीतक कथा उसारै छी
हँसी भेटैत अछि कहाँ, हँसी कते मुसकिल
हँसीक रंगसँ अपन दरद ससारै छी
कतेक नाम कते ठोर लेल गीते थिक
कतेक गीत के दुनिया एखन पसारै छी
बिसरि सकैत छी, ऐ बातकेँ बिसरि जायब
कतेक भोरकेँ ऐ राति धरि नमारै छी
चिन्हार पात सब बिहाड़ि संग उड़िआयल
दिनुक जे ठूँठ बचल, ठूँठकेँ निहारै छी
- पुस्तक : अवान्तर (पृष्ठ 23)
- रचनाकार : मायानन्द मिश्र
- प्रकाशन : मैथिली चेतना परिषद्, सहरसा
- संस्करण : 1977
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