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लहरेला खेतवा में धनवां

lahrela khetva mein dhanvan

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

लहरेला खेतवा में धनवां

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

    लहरेला खेतवा में धनवां,

    देखि झूमि उठे मनवां।

    मनवा में सोचे किसनवां,

    सच होई अबकी सपनवां॥

    खेतवा में धनवां जबसे रोपाइल।

    समय से पानी, समय से सोहाइल॥

    परेला फसिलिया परनवां॥

    देखि झूमि...

    मेहनति अबकी सफल होइ जाई।

    जाई बेकार नाही अबकी कमाई॥

    देखिके जुड़ाला परनवां॥

    देखि झूमि...

    खेतवा में जाके घूमि आव धनिया।

    करि आव जाके मन से सोहनिया।

    मानऽ तूँ हमरो कहनवां॥

    देखि झूमि...

    तोहके गढ़ाइबि हम नाक के नथुनिया।

    झुलनी पाजेब कमर के करधनिया॥

    अउरी गढ़ाइबि कंगनवां॥

    देखि झूमि...

    स्रोत :
    • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 41)
    • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
    • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
    • संस्करण : 2010

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