Font by Mehr Nastaliq Web

कहू आयब कि ने आयब

kahu aayeb ki ne aayeb

अमित पाठक

अमित पाठक

कहू आयब कि ने आयब

अमित पाठक

और अधिकअमित पाठक

    नैना अहीँकेँ ताकय, कहू आयब कि ने आयब

    नहि मोन किछु लागय, कहू आयब कि ने आयब

    नैना अहीँकेँ ताकय...

    कहि गेल छलौं हमरा, घुरि हम अबै छी

    नहि भाँज फेर लागल, कोन लोक डेबै छी

    अत्मा कुहुक उठाबय, कहू आयब कि ने आयब

    नैना अहीँकेँ ताकय...

    राखब एना कते दिन, कहि दिअ एक बेर

    हमहुँ बुझाकऽ राखि लेब, मोनहु अपन फेर

    घुरि-घुरि प्रश्न आबय, कहू आयब कि ने आयब

    नैना अहीँकेँ ताकय...

    जँ यैह प्रीतमे हेतै, बाज छी तखन

    की जानि कोन ठाम छोड़ि, चलि देत के कखन

    रहि-रहि डर सताबय, कहू आयब कि ने आयब

    नैना अहीँकेँ ताकय...।

    स्रोत :
    • पुस्तक : राग-उपराग (पृष्ठ 48)
    • रचनाकार : अमित पाठक
    • प्रकाशन : नवारम्भ
    • संस्करण : 2017

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY