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वही मोरा गाँव

vahi mora gaanv

अन्नू रिज़वी

अन्नू रिज़वी

वही मोरा गाँव

अन्नू रिज़वी

हरे भरे खेतवा की टेढ़ी-मेढ़ी मेड़

नीम बबूल करौंदा के पेड़

अम्बवा के बिरवा की ठंडी-ठंडी छाँव

वही मोरा गाँव, वही मोरा गाँव

गोरे-गोरे हथवा मा मेहँदी साजे

कंगना खनके पायल बाजे

लेके गगरिया चले बच-बच के

चाल कुछ ऐसी कमरिया लचके

जउन डगरिया फिसल जाए पाँव

वही मोरा गाँव, वही मोरा गाँव

आम की बगिया माँ कोयल गाए

आम से मीठा गीत सुनाए

फूलों के मुखड़े को तितली चूमे

भंवरा भी उसके संग झूमे

धूप को भी जहाँ मिल जाए छाँव

वही मोरा गाँव, वही मोरा गाँव

झूमता गाता सावन आए

रिमझिम-रिमझिम जल बरसाए

भीग जाए खेतवा तो भीग जाए तन-मन

दहके जवानी तो नाचे बचपन

बरखा लगाए जहाँ ऊँचे-ऊँचे दाँव

साँझ ढले जब रात निहारे

चाँद जाए सब के दुवारे

कभी छत पे कभी ताल में उतरे

गाँव की चौपाल में उतरे

चाँद से जो प्यारा लगे गाँव

वही मोरा गाँव, वही मोरा गाँव

स्रोत :
  • रचनाकार : अनु रिज़वी
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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