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अंगना बंटइबे करी

angna bantaibe kari

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

अंगना बंटइबे करी

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

    घटि जाई पिरितिया जब भाई-भाई के,

    लोग आपस में तोहके लड़इबे करी।

    बाति मानी ना अपनी जे बाप-माई के

    होई फुटमति तऽ अँगना बँटइबे करी॥...

    सुखवा पड़ोसी के कबहू ना भावे।

    घर की मेहरी के रोज भड़कावे॥

    घुसी घर में तऽ अगिया लगइबे करी॥...

    कान भरी मेहरी जो तोहे समुझाई।

    घरवा की लोगवा पर तोहमत लगाई॥

    मनमें फुटमति सुनिके समइबे करी॥...

    आपन लरिकवा पियार लागी मेहरी।

    छोड़िके लक्ष्मी भागे लगिहें डेहरी॥

    खोट आयी सनेह घटि जइबे करी॥...

    भाई से भाई जब करी बेइमानी।

    आपसी विवाद बढ़ी होई परेशानी॥

    तोहार लोगवा तऽ हंसी उड़इबे करी॥...

    स्रोत :
    • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 28)
    • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
    • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
    • संस्करण : 2010

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