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मेघ नाद कर रहें हैं, गा रही पवन

megh naad kar rahen hain, ga rahi pavan

रत्नेश अवस्थी

रत्नेश अवस्थी

मेघ नाद कर रहें हैं, गा रही पवन

रत्नेश अवस्थी

और अधिकरत्नेश अवस्थी

    मेघ नाद कर रहें हैं, गा रही पवन,

    झूमती दिशा-दिशा खिला हुआ चमन,

    लिख दिया तुम्हारा नाम बार-बार यूँ,

    आरती बनें हैं गीत शब्द हैं भजन,

    मन के सागरों पे सीपियाँ उधार है,

    उपवनों में गई नई बहार है,

    सज गयी वसुंधरा यूँ रोम-रोम भर,

    आज देवि सृष्टि की हुई उदार है,

    वसुंधरा की सुंदरी विहार पर चलो,

    देखते हैं राह चाँद सूर्य औ' गगन,

    आज है प्रणय विहार हर बहार का,

    हर कली के सब्र का भृमर के प्यार का,

    चल रहा सुगंध युक्त ये समीर भी,

    मेघ मद लुटा रहा प्रथम फुहार का,

    तन पे ढलके मोतियों के भाग जग गए,

    नित नये शृंगार का यूँ हो रहा सृजन,

    कल्पनाओं की परी तुम्हें निहार लूँ,

    तुम मिलो मुझे तो जन्म बार-बार लूँ,

    सात ही वचन मुझे निभाने हैं मगर,

    तुम अगर कहो वचन हज़ार बार लूँ,

    एक सृष्टि एक दृष्टि एक नेह का,

    मैं सदा निभा रहा तुम्हें दिया वचन,

    स्रोत :
    • रचनाकार : रत्नेश अवस्थी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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