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करत छेड़ साँवरिया रे

karat chheD sanvariya re

अन्नू रिज़वी

अन्नू रिज़वी

करत छेड़ साँवरिया रे

अन्नू रिज़वी

और अधिकअन्नू रिज़वी

    करत छेड़ साँवरिया रे

    देखत सारी बजरिया रे

    नैनों की भाषा भाने लगी

    सखियों से भी शरमाने लगी

    छलकन लागी गगरिया रे

    करत छेड़ साँवरिया रे

    खेल अजब मोरे साथ करे

    दिन को भी ज़ुल्मी रात करे

    चाँद ले आए अटरिया रे

    करत छेड़ साँवरिया रे

    अँखियों का कजरा दोल गया

    भेद जिया के खोल गया

    बरसन लागी बदरिया रे

    करत छेड़ साँवरिया रे

    उसकी गली का फेरा करूँ

    निस दिन जियूँ निस दिन मरुँ

    बीते इसी में उमरिया रे

    करत छेड़ साँवरिया रे

    प्रेम की नदिया में पल पल बहूँ

    अपने जिया की मैं कासे कहूँ

    कौन है जो ले ख़बरिया रे

    करत छेड़ साँवरिया रे

    लाज से मैं तो लाल हुई

    मस्तानी-सी चाल हुई

    रस्ते में गिर गई चुनरिया रे

    करत छेड़ साँवरिया रे

    स्रोत :
    • रचनाकार : अनु रिज़वी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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