चानोसँ पूछब, सुरुजोसँ पूछब
chanosan puchhab, surujosan puchhab
मार्कण्डेय प्रवासी
Markandeya Pravasi
चानोसँ पूछब, सुरुजोसँ पूछब
chanosan puchhab, surujosan puchhab
Markandeya Pravasi
मार्कण्डेय प्रवासी
और अधिकमार्कण्डेय प्रवासी
चानोसँ पूछब, सुरुजोसँ पूछब,
मन्दिर, मस्जिद आ गिरिजोसँ पूछब।
पूछब जे मानवता कतऽ गेल अछि?
पूछब—विश्वास की विरक्त भेल अछि?
पूछब—सेवाक भावना किए मरल?
पूछब—जिनगी कथी-कथीक लेल अछि?
धरतीसँ पूछब, आकाशोसँ पूछब,
पशु-पक्षी-देव-दनुज-मनुजोसँ पूछब।
आह! आइ मिथिलामे सीता नहि छथि
माण्डवी-जकाँ नवपरिणीता नहि छथि
जनक-याज्ञवल्क्य जानि नहि कतऽ गेलाह!
भारती कहौनिहारि मीता नहि छथि
माँटि-पानि-अन्न आ बसातोसँ पूछब,
अपन खेत आ आनक खनिजोसँ पूछब।
आइ सदाचार अछि विलीन भेल-सन
गामो अछि नगरेमे लीन भेल-सन
गंगो-जल दूषित भऽ गेल लगैए
संगममे सरस्वती क्षीण भेल-सन
मूल्यहीन भेल अछि किएक सत्य-स्नेह,
अवधोसँ पूछब आ मगधोसँ पूछब।
- पुस्तक : हम भेटब (मैथिली गीत-नवगीत संग्रह) (पृष्ठ 65)
- रचनाकार : मार्कण्डेय प्रवासी
- प्रकाशन : जखन-तखन, दरभंगा
- संस्करण : 2004
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