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कंठ के उद्गार में अँगार घोलेंगे

kanth ke udgaar mein angar gholenge

रत्नेश अवस्थी

रत्नेश अवस्थी

कंठ के उद्गार में अँगार घोलेंगे

रत्नेश अवस्थी

और अधिकरत्नेश अवस्थी

    कंठ के उद्गार में अँगार घोलेंगे,

    मैं नही बोलूँगा मेरे गीत बोलेंगे,

    मैं भी लिख सकता यहाँ पर,

    प्यार की बीती कथाएँ,

    और लिख सकता छुवन,

    चुंबन सरीखी कल्पनाएँ,

    कल मुझे कुछ कह रहे थे,

    है नहीं कुछ भाव मुझमें,

    तुम कहो कैसे लिखूँ,

    मैं छद्मवेशी भावनाएँ,

    बिक रहा जब झूठ जग में साँच तोलेंगे,

    मैं नहीं बोलूँगा मेरे गीत बोलेंगे,

    सर झुकाकर अब नहीं,

    ये दासता स्वीकार होगी,

    जंग ये जीने की है तो,

    जंग ये हर बार होगी,

    लाख़ पहरे तुम लगा लो,

    ज़िंदगी के द्वार पर,

    मौत के सौदागरों,

    पल-पल तुम्हारी हार होगी,

    कारनामे ही तुम्हारे राज़ खोलेंगे,

    मैं नहीं बोलूँगा मेरे गीत बोलेंगे,

    स्रोत :
    • रचनाकार : रत्नेश अवस्थी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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