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कबले अइबऽ शहरिया से

kable aibऽ shahariya se

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

कबले अइबऽ शहरिया से

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

    शहरिया से हो, शहरिया से,

    कबले अइबऽ मोर बलमुआ शहरिया से॥...

    खेती किसानी के समय अब आइल।

    बुढ़वा बएल रहे ऊहो बिकाइल॥

    कवनो तरे अबकी खेतवा बोवाइल,

    कइसे पानी चली अबकी नहरिया से॥ कबले...

    मुनुआ सेयान भइल पढ़े अब जाई।

    कापी किताब पेन कइसे किनाई॥

    गुड़िया के फीस बिनु छूटल पढ़ाई,

    कवनो सुखवा नइखे तोहरी नोकरिया से॥ कबले...

    अम्मा जी के साड़ी बाबू जी के मरदानी।

    हमरो के चाहीं एगो साड़ी रंग धानी॥

    धानी ना मिली तऽ ले अइहऽ असमानी,

    ऊहो लेले अइहऽ पटना बजरिया से॥ कबले...

    बाति-बाति के इहाँ बाटे परेशानी।

    साँच सब लिखीं हम, झूठ जनि जानीं॥

    घर में मेहमान आइल तोहरे निसानी,

    अनजा चूकि गइल सगरो बखरिया से॥...

    स्रोत :
    • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 12)
    • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
    • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
    • संस्करण : 2010

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