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जागौ धरती मइया

jagau dharti maiya

अशोक अज्ञानी

अशोक अज्ञानी

जागौ धरती मइया

अशोक अज्ञानी

और अधिकअशोक अज्ञानी

    जागौ-जागौ धरती मइया, चारिउ क्वान बराबर जागौ।

    जागै दिया दिवाली जागै, जागै भाईचारा।

    जागै चंदा, सूरज जागै, जागै जीवन धारा।

    जागै नइया औरु खेवइया, चारिउ क्वान बराबर जागौ।

    लइकै चलनी सुघरि सुहागिनि , करवा चौथ मनावै।

    एकादसी सूप जागै तौ, घर-घर ईसुर आवै।

    जागै हड़ा-हड़ा हड़वइया, चारिउ क्वान बराबर जागौ।

    जोगी जोगु जगावै जंतर-मंतर पावन जागै।

    परम प्रेमु हिरदय मा घर-घर, गाँवन-गाँवन जागै।

    जागै भवन पवन पुरवइया, चारिउ क्वान बराबर जागौ।

    किस्सा औरु किहानी जागै, जागै अपनि किसानी।

    अज्ञानी फिरि जागि जाय यहि भारत केरि जवानी।

    जागै आपनि सोन चिरइया, चारिउ क्वान बराबर जागौ।

    स्रोत :
    • रचनाकार : अशोक अज्ञानी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित।

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