मन होइयै अहाँकेँ टोकी आ कि नञि टोकी
man hoiyai ahanken toki aa ki nani toki
मायानंद मिश्र
Mayanand Mishra
मन होइयै अहाँकेँ टोकी आ कि नञि टोकी
man hoiyai ahanken toki aa ki nani toki
Mayanand Mishra
मायानंद मिश्र
और अधिकमायानंद मिश्र
मन होइयै अहाँकेँ टोकी आ कि नञि टोकी।
आँखिक जे छन्दमे अछि
अधरक कतेक भाषा
आँचरके रंगमे अछि
लाजक जेना परिभाषा
जे गीत बहि रहल अछि, रोकी, आ कि नञि रोकी।
ड्योढ़ीक बाँहिमे अछि
स्वागत जेना उताहुल
आङन के टाट भरिदिन
खड़िये जेना उचारल
जे रूप बहि रहल अछि रोकी, आ कि नञि रोकी।
बाटक जे मोड़ सब अछि
सबपर हकार साटल
यौवन के द्वारपर अछि
कालक कहार राखल
जे साँस बहि रहल अछि, रोकी, आ कि नञि रोकी।
साँझक करेजपर अछि
रातुक पहाड़ राखल
जीवन के छन्दमे अछि
गीतक पथार लागल
जे प्यास बहि रहल अछि, रोकी, आ कि नञि रोकी।
- पुस्तक : अवान्तर (पृष्ठ 42)
- रचनाकार : मायानन्द मिश्र
- प्रकाशन : मैथिली चेतना परिषद्, सहरसा
- संस्करण : 1977
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