सजनी गे गोखुला नगरिया कैसे
sajni ge gokhula nagariya kaise
(बारहमासा)
सजनी गे गोखुला नगरिया कैसे जीयौं बिनु श्याम
आतप जेठ असाढ़ महीना माधव गेल विदेश
शीतल श्यामसुन्दर नहि ऐला के लै जाय सन्देश
सावन भादव भरि गेल नदिया नहि ऐला नन्दलाल
पावस ऋतु रिपु आयल सखिया दिवस रैनि यौ काल
आसिन कातिक केशव पूजै लेसै दीप अकास
हमरा सर्द-सर्द कए देलक डालि प्रेम केर फाँस
अगहन पूस पड़े तन पाला पीताम्बर के गेह
मोहि हेमन्त अन्त कए देलक रैन सताबै देह
आयल माघ फागुन के औसर शिशिर फैलु भरि गात
पूजि बसन्त गाय हरि फागुन मुख नहि आवय बात
चैत बैसाख बसन्त सुहावन बाढय बिरह अपार
लक्ष्मीपति प्रभु मोहि भुलैला कोना तरौं भव पार
- पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 383)
- संपादक : अणिमा सिंह
- प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
- संस्करण : 1993
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