Font by Mehr Nastaliq Web

सजनी गे गोखुला नगरिया कैसे

sajni ge gokhula nagariya kaise

अज्ञात

अज्ञात

सजनी गे गोखुला नगरिया कैसे

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    (बारहमासा)

    सजनी गे गोखुला नगरिया कैसे जीयौं बिनु श्याम

    आतप जेठ असाढ़ महीना माधव गेल विदेश

    शीतल श्यामसुन्दर नहि ऐला के लै जाय सन्देश

    सावन भादव भरि गेल नदिया नहि ऐला नन्दलाल

    पावस ऋतु रिपु आयल सखिया दिवस रैनि यौ काल

    आसिन कातिक केशव पूजै लेसै दीप अकास

    हमरा सर्द-सर्द कए देलक डालि प्रेम केर फाँस

    अगहन पूस पड़े तन पाला पीताम्बर के गेह

    मोहि हेमन्त अन्त कए देलक रैन सताबै देह

    आयल माघ फागुन के औसर शिशिर फैलु भरि गात

    पूजि बसन्त गाय हरि फागुन मुख नहि आवय बात

    चैत बैसाख बसन्त सुहावन बाढय बिरह अपार

    लक्ष्मीपति प्रभु मोहि भुलैला कोना तरौं भव पार

    स्रोत :
    • पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 383)
    • संपादक : अणिमा सिंह
    • प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1993

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY