बिरह वेदन सखि दए गेल प्रियतम बसु परदेस यो
birah vedan sakhi de gel priytam basu pardes yo
(चौमासा)
बिरह वेदन सखि दए गेल प्रियतम बसु परदेस यो
हरि हरि पी करत दुःख कर कते हम सहब कलेस यो
हम सहब कतेक कलेस बालम बिनु अषाढक मास यो
कन्त गेल तुरन्त तजि मोहि धरब कोन विधि आस यो
हम आस केहि विधि धरब अनुछन सहब दुसह दुख दर्द यो
दुसह ताप मलिन केहि विधि सहब बिनु नन्द नन्द यो
नन्द नन्दन भेला परबस परतिय लोलुप भेल यो
भेलहुँ निरास आस तजि सब सुख हरि संग गेल यो
गेल सब सुख सकल पहु संग सुखद सावन मास यो
अपन प्रियतम संग झुलितौं हरषि सब सखि साथ यो
हरषि सब सखि साथ निज पिया करत हास बिलास यो
हमर पिया परदेस गेल बारि बयस निहारि यो
एखनुक ई मन दुःख पीड़ा नहि जानतु घनश्याम यो
घनश्याम कामुक कन्त परिहरि नारि परबस भेल यो
भवन भादव मास लखि पहु दुसह दुख मोर देल यो
दुसह दुख अवधरि जीवन धैल पिया केर आस यो
आस कए परिहास हम धनि भेलहुँ संग निरास यो
भेलहुँ निरास आस तजि जीवन भेल दुख दैन्य यो
हरि बिनु हृदय दगध भेल पड़त हृदय नहि चैन यो
पड़त चैन न हृदय बिच मोर सदत मन अकुलाय यो
मास आसिन अवधि बीतल पिया रहल कत जाय हो
यद्यपि ओ पहु पलटि औता होयत जौं नित संग यो
तदपि एखनुक मिटत केहि बिधि कठिन ओ मन भंग यो
- पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 354)
- संपादक : अणिमा सिंह
- प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
- संस्करण : 1993
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