Font by Mehr Nastaliq Web

सुनू सुनू यौ सरकार मानू कहलो हमार

sunu sunu yau sarkar manu kahlo hamar

अज्ञात

अज्ञात

सुनू सुनू यौ सरकार मानू कहलो हमार

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    (बारहमासा)

    सुनू सुनू यौ सरकार मानू कहलो हमार

    अहाँ रहि जैबै मिथिला नगरियामे

    आयल पूसहि मास जियरा फूलै हुलास

    अहाँ सब सुख सुनू ससुररियामे

    माघ सिसिर सोहाय दीहो प्रेम के रजाय

    जाड़ा लागैयो नहि देबनि एहि देहियामे

    फागुन फगुआ खेलायब रंग घोरि-घोरि लायब

    भरि-भरि मारब पिचकरियामे

    आयल चैत ऋतुराज फूले फूलक समाज

    मनुआ लगि जैते सीता फुलबरियामे

    आयल तपन बैसाख तन तलफत लाग

    प्यारे अहाँ के छिपायब छतियामे

    आयल जेठहि मास हाय सहलो जाय

    मनुआ लागि जायत आम के चटनियामे

    आयल मास असाढ़ जल बरसनि लाग

    मनुआ लागि जायत आम के चटनियामे

    आयल सावन संभार झूला करब तैयार

    झूला झूलि लियऽ सीया फुलबरियामे

    आयल भादब मास हिया काँपै एहि मास

    अहाँ कोना रहबै राति अन्हरियामे

    आयल मास कुँआर सर्द पड़ैये तुसार

    गीत गा कऽरिझायब अटरियामे

    भ्रातृ द्वितीया मनायब कार्तिक शान्ति के बुलायब

    हाथ धरि कय घुमायब बजरियामे

    मार्ग शीर्ष मनायब गारी दऽ कय हँसायब

    सब दर्द बिसरायब नगरियामे

    स्रोत :
    • पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 363)
    • संपादक : अणिमा सिंह
    • प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1993

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY