भोजपुरी लोकगीत : का संगे होरी खेलों री, बन बोलेला मोर
bhojapuri lokgit ha ka sange hori khelon ri, ban bolela mor
रोचक तथ्य
संदर्भ—एक स्त्री की वियोग-व्यथा।
का संगे होरी खेलों री, बन बोलेला मोर।।टेक।।
आम के डाढ़ि कोयलिया, बन बोलेला मोर।
का संगे होरी खेलों री, एक राधे दूजे नन्द किसोर।।1।।
आवन कूँ सइयाँ कहि गइले, अरुझेले कवनी ओर।
का संगे होरी खेलों री, एक राधे दूजे नन्द किसोर।।2।।
एक स्त्री अपनी प्रिय सखी से अपनी वियोग-व्यथा का इज़हार करती है—
सखी, मैं किसके साथ होली खेलूँ? देखो, वन में मोर बोल रहा है (मानो
मुझे प्रियतम की याद दिला रहा है)।।टेक।।
आम की डाल पर कोयल बोल रही है और वन में मोर बोल रहा है। मैं
किसके साथ होली खेलूँ? राधा और कृष्ण तो परस्पर खेल रहे हैं।।1।।
- पुस्तक : हिंदी के लोकगीत (पृष्ठ 104)
- संपादक : महेशप्रताप नारायण अवस्थी
- प्रकाशन : सत्यवती प्रज्ञालोक
- संस्करण : 2002
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