राहुल सांकृत्यायन की विरासत और ज्ञान संरक्षण की चुनौतियाँ
हिन्दवी डेस्क
08 अप्रैल 2026
ज्ञान केवल पुस्तकों, पांडुलिपियों और अभिलेखों में सीमित नहीं होता, बल्कि वह एक जीवंत परंपरा है। वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी विचार, अनुभव और संवेदनाओं के माध्यम से प्रवाहित होता है। इसी ज्ञान-परंपरा को सहेजने और उसके समक्ष उपस्थित समकालीन चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने के उद्देश्य से महापंडित राहुल सांकृत्यायन के परिजनों द्वारा संचालित संस्था ‘द राहुल सेंटर’ उनकी 133वीं जयंती (9 अप्रैल 2026) के अवसर पर ‘ज्ञान संरक्षण की चुनौतियाँ’ विषय पर एक महत्त्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन कर रही है।
यह आयोजन राहुल सांकृत्यायन के परिजनों द्वारा लगभग पिछले 40 वर्षों से निरंतर आयोजित किया जाता रहा है। इस परंपरा के अंतर्गत ‘राहुल सांकृत्यायन स्मारक व्याख्यान’ के रूप में अनेक महत्त्वपूर्ण व्याख्यान संपन्न हुए हैं। इन्हीं व्याख्यानों के लेखों का एक सुंदर संकलन ‘नई दुनिया की संभावना’ नाम से स्वराज प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है, जिसका संपादन आलोचक मैनेजर पांडेय एवं महापंडित राहुल सांकृत्यायन प्रतिष्ठान (अब ‘राहुल सांकृत्यायन शोध एवं सामाजिक विकास केंद्र’ जिसे संक्षेप में ‘द राहुल सेंटर’ कहा जाता है) के पूर्व सचिव अनिल कुमार पांडेय द्वारा किया गया है। यह संकलन इस बौद्धिक परंपरा की समृद्धि और निरंतरता का साक्ष्य है।
इन स्मारक व्याख्यानों की परंपरा स्वयं इस बात का प्रमाण है कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विचारों की एक सतत धारा है। विभिन्न वर्षों में आयोजित व्याख्यानों में देश के अनेक प्रतिष्ठित विद्वानों ने भाग लिया है और अपने-अपने विषयों विचार प्रस्तुत किए हैं। इन व्याख्यानों की सूची में ‘भागो नहीं (दुनिया को) बदलो’ (नामवर सिंह); ‘भारत में लोकतंत्र का भविष्य’ (ब्रह्मदेव शर्मा); ‘मध्य एशिया और आर्य समस्या’ (रामशरण शर्मा); ‘राहुल की परिवर्तनकामी इतिहास दृष्टि का सूचक : मध्य एशिया का इतिहास’ (लाल बहादुर वर्मा); ‘अभिशप्त यात्री’ (राजेंद्र यादव); ‘इतिहास और कथा-साहित्य’ (अरुण प्रकाश); ‘राहुल का कथा-कर्म और इतिहास बोध’ (मधुरेश); ‘महापंडित राहुल सांकृत्यायन और अपभ्रंश’ (विश्वनाथ त्रिपाठी); ‘पालि, संकर संस्कृत-प्राकृत और बौद्ध दर्शन को महापंडित राहुल सांकृत्यायन का अवदान’ (संघसेन सिंह); ‘महापंडित राहुल सांकृत्यायन और बौद्ध संस्कृति’ (तुलसी राम); ‘राहुल जी का बौद्ध धर्म, दर्शन और संस्कृति को अवदान’ (अनिल कुमार पांडेय); ‘मध्ययुगीन समाज और रहीम’ (मुजीब रिज़वी); ‘दूसरी दुनिया की संभावना’ (रणधीर सिंह); ‘किसान का भविष्य’ (लाल बहादुर वर्मा) सहित अनेक महत्त्वपूर्ण विषय शामिल रहे हैं।
आगे के व्याख्यानों में ‘भूमंडलीकरण के दौर में ग़ैर बराबरी का सवाल’ (सच्चिदानंद सिन्हा); ‘संस्कृत, पाली और प्राकृत की कविता में भारतीय लोकजीवन’ (राधावल्लभ त्रिपाठी); ‘भोजपुरी समाज, साहित्य और भाषा को राहुल जी का योगदान’ (ब्रज किशोर); ‘स्थानीयता के प्रति प्रतिबद्ध राहुल सांकृत्यायन’ (मैनेजर पांडेय); ‘राहुल सांकृत्यायन : प्रगतिशील योगदान’ (मुरली मनोहर प्रसाद सिंह); ‘लोक साहित्य की वर्तमान प्रासंगिकता और राहुल’ (अवधेश प्रधान); ‘राहुल सांकृत्यायन और हिमालय’ (शेखर पाठक); ‘स्त्री स्वाधीनता/मुक्ति : राहुल जी के संदर्भ में’ (रूपा कुलकर्णी बोधी); ‘राहुल के लेखन में जनजातीय जीवन’ (गुणाकर मुले) तथा ‘राहुल जी के सरोकार’ (मैनेजर पांडेय) जैसे विषयों पर भी विमर्श हुआ है। यह विस्तृत सूची इस परंपरा की वैचारिक व्यापकता और गहराई को रेखांकित करती है।
महापंडित राहुल सांकृत्यायन भारतीय बौद्धिक परंपरा के ऐसे अद्वितीय व्यक्तित्व रहे हैं, जिन्होंने ज्ञान के संरक्षण और प्रसार को अपने जीवन का ध्येय बनाया। तिब्बत और एशिया के अन्य क्षेत्रों से दुर्लभ पांडुलिपियों और ज्ञान-स्रोतों को सुरक्षित कर उन्होंने न केवल इतिहास की अमूल्य धरोहर को बचाया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान के द्वार भी खोल दिए। उनका जीवन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि ज्ञान का संरक्षण केवल संग्रह का कार्य नहीं, बल्कि एक वैचारिक प्रतिबद्धता भी है।
आज के समय में, जब पुस्तकों, अभिलेखों और इतिहास की व्याख्याओं को बदलने अथवा पुनर्गठित करने की प्रवृत्तियाँ विभिन्न स्तरों पर दिखाई दे रही हैं, तब यह आवश्यक हो जाता है कि ज्ञान के संरक्षण और उसके विवेकपूर्ण उपयोग पर गंभीर संवाद स्थापित किया जाए। यह परिचर्चा इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आयोजित की जा रही है, जहाँ वक्ता अपने विचारों के माध्यम से इस विषय की गहराई को उद्घाटित करेंगे।
इस विचार पर्व में प्रतिष्ठित विद्वानों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, जो ज्ञान संरक्षण के विविध आयामों—ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक—पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ इतिहासकार सलिल मिश्र करेंगे। विशिष्ट वक्ता के रूप में अशोक कुमार पांडेय, मुख्य वक्ता के रूप में मणीन्द्रनाथ ठाकुर तथा विषय प्रवेश मृत्युंजय द्वारा किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन जगन्नाथ दुबे करेंगे।
यह परिचर्चा दिनांक 9 अप्रैल 2026 को सायं 4:30 से 7:00 बजे तक उर्दू घर, 212, राउज़ एवेन्यू, डॉ. डी.डी.यू. मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। निकटतम मेट्रो स्टेशन ITO (गेट नं. 2) है, जिससे स्थल तक पहुँचना सुविधाजनक है।
‘द राहुल सेंटर’ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि एक विचारात्मक पहल है, जो ज्ञान की परंपरा को समझने, संरक्षित करने और उसे समकालीन संदर्भों में पुनर्स्थापित करने का प्रयास है। इस अवसर पर सभी विद्वानों, शोधार्थियों और रखने वाले नागरिकों से अपेक्षा है कि वे इस विमर्श में सहभागी बनकर इसे और अधिक सार्थक बनाएँ।
कार्यक्रम के संयोजक अनुराग अंकुर ने इस अवसर बात करते हुए कहा—“यह कार्यक्रम केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि एक विचारात्मक पहल है, जो ज्ञान की परंपरा को समझने, संरक्षित करने और उसे समकालीन संदर्भों में पुनर्स्थापित करने का प्रयास है।”
'बेला' की नई पोस्ट्स पाने के लिए हमें सब्सक्राइब कीजिए
कृपया अधिसूचना से संबंधित जानकारी की जाँच करें
आपके सब्सक्राइब के लिए धन्यवाद
हम आपसे शीघ्र ही जुड़ेंगे
बेला पॉपुलर
सबसे ज़्यादा पढ़े और पसंद किए गए पोस्ट