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इस बार के नोबेल विजेता लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई के 10 नीतिवचन

यह बात अपने दिमाग़ में घुसा लो—चुटकुले ज़िंदगी की तरह होते हैं।

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जब मैं काफ़्का को नहीं पढ़ रहा होता हूँ, तब मैं काफ़्का के बारे में सोच रहा होता हूँ। जब मैं काफ़्का को नहीं सोच रहा होता हूँ, तब मैं काफ़्का के बारे में सोचने की स्मृति में होता हूँ। और कुछ देर तक उनके बारे में सोचना भूलने पर, मैं उन्हें फिर से निकालकर पढ़ने लगता हूँ। यह सिलसिला इसी तरह चलता रहता है।

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जो चीज़ें बुरी तरह शुरू होती हैं, वे बुरी तरह ही ख़त्म होंगी। मध्य में सब ठीक रहता है, तुम्हें बस अंत की चिंता करनी चाहिए।

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ऐसा नहीं है कि मैं यह नहीं समझता कि एक व्यक्ति को मरना क्यों पड़ता है, बल्कि मैं यह नहीं समझ पाता कि एक व्यक्ति को जीना क्यों पड़ता है!

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बुराई का अस्तित्व है और दुख की बात यह है कि अच्छाई कभी उससे आगे नहीं बढ़ पाती।

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हर चीज़ के पीछे के कारण को तलाशना हमेशा ज़रूरी नहीं होता, क्योंकि हर वजह बेबुनियाद होती है। कारण एक निश्चित नज़रिये से ही कारण दिखाई देता है।

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उसने महसूस किया : मृत्यु—मायूसी और स्थायी अंत नहीं, बल्कि एक प्रकार की चेतावनी है।

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प्रकाश ने उसे आशा दी, लेकिन वह उससे डरता था।

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स्मृति भूल जाने की कला है।

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बाहर एक युद्ध चल रहा है और इस निराशा भरी रात में जागना तभी संभव है—जब तुम पूरी तरह निर्दय होने के लिए तैयार हो।

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अँग्रेज़ी से अनुवाद : हरि कार्की

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