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ऋतुराज

1940 | भरतपुर, राजस्थान

समादृत कवि। प्रगतिशील लेखक संघ से संबद्ध।

समादृत कवि। प्रगतिशील लेखक संघ से संबद्ध।

कविता 35

उद्धरण 5

जो लोग कविता से निरी कलात्मकता की अपेक्षा करते हैं, वे कविता के वस्तु-सत्य को गौण रखना चाहते हैं।

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कवि अपनी विचारधारा को बिना कलात्मक रूप दिए अवाम पर कोई भरपूर प्रभाव नहीं डाल सकता।

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विचार और कलात्मकता के संतुलन पर ही आधुनिक कवि की सफलता या असफलता, शक्ति या दुर्बलता निर्भर करती है।

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सारी संभावनाएँ स्थापित होने पर ख़त्म हो जाती हैं।

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मुक्ति के बिना समानता प्राप्त नहीं की जा सकती और समानता के अभाव में मुक्ति संभव नहीं है।

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