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भजन करु संसै ना करु रे

bhajan karu sansai na karu re

दूलनदास

दूलनदास

भजन करु संसै ना करु रे

दूलनदास

भजन करु संसै ना करु रे।

सबद बिचारि खोजि ले मारग, चित तैं चेतहु वोहु घरु रे।

साईं मनसा फल के दाता, दृढ़ बिश्वास हृदय घरु रे॥

अपने अंतर अंबर डोरी, गहु तोहि काहुहिं ना डरु रे।

दूलनदास के साईं जगजीवन, अब दै सीस चरन परु रे॥

स्रोत :
  • पुस्तक : संतबानी (पृष्ठ 12)
  • रचनाकार : दूलनदास
  • प्रकाशन : प्रोप्रैटर वेलवेडियर छापाखाना इलाहाबाद
  • संस्करण : 1914

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