रोला

अर्द्धसम मात्रिक छंद। चार चरण। प्रत्येक चरण में चौबीस-चौबीस मात्राएँ। क्रम से ग्यारह-तेरह मात्राओं पर यति।

अयोध्या नरेश। रीतिकाल की स्वच्छंद काव्य-धारा के अंतिम कवि। ऋतु वर्णन के लिए प्रसिद्ध।

1820 -1870

भारतेंदु युग के कवि। ब्रजभाषा काव्य-परंपरा के अंतिम कवियों में से एक।

1879 -1918