बुद्धिजीवी
मेरे मित्र लज्जा शंकर यूनिवर्सिटी में दर्शन के अध्यापक थे। साहित्य से उनको विशेष रूचि थी। वे स्वयं कविता लिखते थे और नशीली-सी आँखों से साहित्य-संबंधी बातें करते थे। जीवन के प्रति उनके उच्च आदर्श थे; छोटी बात वे मन में लाते तक न थे। अतएव सभी उनके मीठे