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हँसत लसत तांबूल बदन

hansat lsat tambul badan

बाल अली

बाल अली

हँसत लसत तांबूल बदन

बाल अली

हँसत लसत तांबूल बदन सों गंध सकेलें।

जनु फूल्यो हृद कमल उठत सौरभ की रैलें॥

चिबुकारुण सुखमा अपार झलकत मुखझांई।

मनहुँ कि व्यापक ब्रह्म ज्योति यह वेद गाई॥

कंबु कंठवर रेख लसत अवधेश सुवन की।

करी जानि छवि सीव लीक जनु त्रय त्रिभुवन की॥

स्रोत :
  • पुस्तक : रामभक्ति-साहित्य में मधुर उपासना (पृष्ठ 235-236)
  • संपादक : भुवनेश्वरनाथ मिश्र माधव
  • रचनाकार : बाल अली
  • प्रकाशन : बिहार-राष्ट्रभाषा-परिषद्, पटना
  • संस्करण : 1975
हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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