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सुमरन प्रभुजी को करि रे प्रानी

sumran prabhuji ko kari re prani

बख्तराम साह

बख्तराम साह

सुमरन प्रभुजी को करि रे प्रानी

बख्तराम साह

सुमरन प्रभुजी को करि रे प्रानी।

कौन भरोसे तू सोवै निसिदिन, अष्ट करम तेरे अरि रे॥

इनके मेरे रे गए हैं नरकिहि, रावन आदि भए महिमानी।

गए अनेक जीव अनगिनती, तिनकी अब कहा कहिए कहानी॥

इनके वसि नाना विधि नाच्यों, तामें कहो कौन सिधि जानी।

लख चौरासी में फिर आयौ, अजहूँ समझि-समझि अग्यानी॥

यह जानि भजि वीतराग को, और कछु मन में मति आनी।

बखतराम भवदधि तिर है, मुक्ति वधू सुख पै है सग्यानी॥

स्रोत :
  • पुस्तक : हिंदी पद संग्रह (पृष्ठ 164)
  • संपादक : कस्तूरचंद कासलीवाल
  • रचनाकार : बख्तराम साह
  • प्रकाशन : गैंदीलाल साह, महावीर भवन, जयपुर
  • संस्करण : 1965
हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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