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चसमा नित्य बिहार कौ

chasma nity bihar kau

भगवत रसिक

भगवत रसिक

चसमा नित्य बिहार कौ

भगवत रसिक

चसमा नित्य बिहार कौ, दियो बिहारिनि मोहि।

भई प्रीति-परतीति उर, अंतर लीनों जोहि॥

अंतर लीनों जोहि, निरंतर निज धन पायो।

नारद सुक सनकादि, ‘नेति' निगमागम गायो॥

‘भगवत' रस-रीति प्रकट, परिपूरन ससमा।

प्रेम-पियूष स्रवे, भाव-रूपी बिनु चसमा॥

स्रोत :
  • पुस्तक : ब्रजमाधुरी सार (पृष्ठ 222)
  • रचनाकार : भगवतरसिक
  • प्रकाशन : हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग
  • संस्करण : 2002
हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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