पातूर पूतरी पीत पहिरे पट कैधों ये
patur putari peet pahire pat kaidhon ye
बलभद्र मिश्र
Balbhadr Mishra

पातूर पूतरी पीत पहिरे पट कैधों ये
patur putari peet pahire pat kaidhon ye
Balbhadr Mishra
बलभद्र मिश्र
और अधिकबलभद्र मिश्र
पातूर पूतरी पीत पहिरे पवित्र पट,
कैधों ये सकल सुख वासना के घ्रान हैं।
पियरूप पीबे को अधर आछे ‘बलिभद्र’,
सौतिन को एकौ पल कल ना निदान हैं॥
खंजरीट पीजरे कि कनक के संपुट हैं,
जिनमें बसत प्यारे प्रीतम के प्रान हैं।
कामतुला पला हैं पलक तेरे भामिनी कि,
क्रिया के कपाट कैधौं तारन को त्रान हैं॥
- पुस्तक : हिंदी काव्य गंगा, प्रथम भाग (पृष्ठ 191)
- संपादक : सुधाकर पांडेय
- रचनाकार : बलभद्र मिश्र
- प्रकाशन : नागरीप्रचारिणी सभा, वाराणसी
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