जल में आकाश

jal mein akash



जल में आकाश


और अधिकप्रकाश

    बहते जल में प्रस्फुटित होता था आकाश

    आकाश में जल घिरता था

    घर्र-घर्र गरजता जल

    टूट कर ढहता था

    गिरता था आकाश

    आकाश जल में गिरता था!

    स्रोत :
    • पुस्तक : आवाज़ में झर कर (पृष्ठ 16)
    • रचनाकार : प्रकाश
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2018

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