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कुछ तो मेरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख

kuch to mere pindar e mohabbat ka bharam rakh1

सुजाता

सुजाता

कुछ तो मेरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख

सुजाता

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    एक

    प्रेम की हिचकियों के बीच
    पानी का घूँट भी गुनाह है
    तुम्हें ऐसे ही मर जाना चाहिए
    अगर आँसू काफ़ी नहीं हैं
    तर रहने के लिए।

    दो

    अक्सर ही करते हैं मर्द
    स्त्रियों की तुलना
    किसी से क़द की तुलना
    किसी से रंग की
    उन्हें सिखाया गया कि
    क़द या रंग से क्या होता है?

    सीखने वाले पुरुष अच्छे होते हैं
    अगली बार वे बोले
    अमुक का चेहरा तुमसे ज़्यादा है आकर्षक!

    तीन

    जिन्हें जुदाई बरदाश्त नहीं होती
    लड़ लेते हैं जाने से पहले
    जिन्हें बरदाश्त नहीं होती जुदाई
    साथ रहते हैं और लेते रहते हैं बदला।

    चार

    मैंने कहा—
    तुम कैसे हमेशा ही तैयार हो न
    मुझे खोने के लिए!

    उसने कहा—
    तुम मुझे पाना क्यों नहीं चाहती?

    पाँच

    एक दिन हँसी ग़ायब हो गई
    रात के आख़िरी पहर
    अंदर से आवाज़ आई
    Thou shalt love—
    Thou shalt not kill—
    ख़ुद से कहा मुझे प्यार करो
    ख़ुद से कहा मुझे मारो मत।

    छह

    मैं फ़व्वारे के नीचे थी
    प्यार की तरह बरस रहा था पानी

    अब वह फ़व्वारे के नीचे है
    मैं भरम में।

    सात

    मुझे भरम था
    वह मेरी तलाश में आया
    प्यास अक्सर डालती है
    जानलेवा भुलावे में।

    ____

    शीर्षक : अहमद फ़राज़ का एक मिस्रा’

    स्रोत :
    • रचनाकार : सुजाता
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    ‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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