लगभग

lagbhag

अनुराग अनंत

और अधिकअनुराग अनंत

    एक लगभग की पीड़ा दूसरा लगभग ही समझ सकता है

    एक लगभग हारे हुए व्यक्ति को दूसरा लगभग हारा हुआ व्यक्ति जब देखता है तो

    आइने में लगभग हारने का प्रतिबिंब उभर आता है

    एक लगभग टूटे हुए व्यक्ति को जब दूसरा लगभग टूटा हुआ व्यक्ति छूता है तो

    लगभग टूटा हुआ

    लगभग जुड़े हुए में बदल जाता है

    एक लगभग प्यासा आदमी दूसरे लगभग प्यासे आदमी के लिए लगभग नदी होता है

    एक लगभग विस्थापित दूसरे लगभग विस्थापित में पाता है शरण

    लगभग भुला दिए गए लोग ही याद रखते हैं लगभग भुला दिए गए लोगों को

    लगभग भटक चुके लोग ही गंतव्य तक पहुँचाते हैं लगभग भटक चुके लोगों को

    लगभग बेसहारा ही सहारा देता है दूसरे लगभग बेसहारा को

    लगभग उपेक्षितों से ही अपेक्षा है फिसलती हुई दुनिया को थाम लेंगे वे

    स्रोत :
    • रचनाकार : अनुराग अनंत
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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