Font by Mehr Nastaliq Web

गीत स्वर्गीय कवि का

geet svargiy kavi ka

अनुवाद : श्यौराजसिंह जैन

दोब्रिषा त्सेसारिच

दोब्रिषा त्सेसारिच

गीत स्वर्गीय कवि का

दोब्रिषा त्सेसारिच

और अधिकदोब्रिषा त्सेसारिच

    मित्र मेरे, अब नहीं रहा मैं।

    लेकिन महज़ धरती, महज़ घास भी नहीं हूँ मैं।

    क्योंकि वह पुस्तक, हमारे हाथ में जो है,

    मुझ सोए हुए का भाग ही तो है।

    जो भी उसे पढ़ता जगाता जीवन मुझ में।

    मुझे जगा लो, तुम्हारा यथार्थ बन जाऊँगा मैं।

    मेरे नहीं रहे अब ग्रीष्म और मधुकाल,

    शरद भी नहीं और ही मेरे शीतकाल।

    दीन मृतक हूँ मैं, जो अपने में कुछ भी

    इस संसार का गृहण नहीं कर सकता।

    और जो बचा है उज्ज्वल जीवन का,

    केवल तुकें ही रह गई हैं मेरे आलिंगन में।

    मृत्यु से पूर्व मैंने स्वयं को छिपाया (जितना छिपा सका)

    पंक्तियों में। उन्हें आग में तपाया।

    पर यदि हृदय बंद कर लो उनके आगे

    केवल छाया और मृत शब्द हैं वे।

    खोल दो उसे, मैं चला आऊँगा तुम में

    प्रचुर सरिता जैसे नये अंचल में।

    कोई क्षण और जीऊँ चाह रही

    तुम्हारे सीने में। सुंदरता सारी अपनी

    तुम्हें दे दूँगा। सब विचार सब सपने

    सब जो छीने निर्दयी काल ने

    सारा प्रहर्ष, प्रेम, आशाएँ समस्त

    सारी स्मृतियाँ—ओ जीवन मृत!

    विगत मेरे दिनों में मुझे बुला लो!

    मुझे लालसा प्रकाश की! रवि की जो

    स्वर्णिम करता जिसे छू लेता, गर्मी की,

    ऊषा की, सखा मेरे अचीह्न

    प्रहर्ष की भी! सितारे अब नहीं रहे

    मेरी रातों में जो। मुझे, प्रिय, उनको वापिस ला दो।

    ज्यों प्रकाश पर रात के पतंगे

    जीवन पर यों शोकगीत मँडराते।

    मदद करो मैं खोल सकूँ अपनी पलकें

    हाथ कामना में मेरे फैल सकें।

    मैं चाहता हूँ युवा बनूँ, मैं प्रेम करूँ,

    प्रेयस बन जाऊँ मेरे साथी अनजाने!

    मेरा सारा जीवन अब हाथों में तेरे।

    मुझे जगा ले! दोनों जी लेंगे

    मेरी पंक्ति द्वारा थामे सारे क्षण,

    अतीत के सभी सुरक्षित स्वप्न।

    मैं भिक्षुक हूँ जीवन के दरवाज़े पर।

    मेरी दस्तक सुनो! क़ब्र से मेरा स्वर!

    स्रोत :
    • पुस्तक : समकालीन यूगोस्लाव कविता-1 (पृष्ठ 61)
    • संपादक : श्यौराजसिंह जैन
    • रचनाकार : दोब्रिषा त्सेसारिच
    • प्रकाशन : बाहरी पब्लिकेशंस, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1978

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY