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सबकै माई तू

sabakai mai tu

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

और अधिकआद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

    आजा, बाप, भाय, भौजाई सबकै माई तू,

    जातपात सब चले भुलाई सबकै माई तू,

    तोहरे नाते भाई-भाई सबकै माई तू,

    परबत से लै सागर ताईं सबकै माई तू।

    भाषा घरम जात कै सारा भेद मिटाऊ तू,

    कहाँ-कहाँ से दौड़ा आए भेंट कराऊ तू,

    देखि दुखी काया कपूत कै नीर बहाऊ तू,

    खाई खंधक कूदि-कूदि के उछरत आऊ तू।

    झमकत चलू, सरग से गरजत चमकल आऊ तू,

    बमकत चलू कभौं तेहा से तमकत आऊँ तू,

    दमकत चलू, पाप का धै-धै धमकत आऊ तू,

    ढलकत चलू, कर्भी अमरित से छलकत आऊ तू।

    ऊँचे खाले अँटकत भटकत दौरत लहर चली,

    महा समुंदर मा मछरी जस पौरत लहर चली,

    अमरित की धारा माँ सबका बोरत लहर चली,

    हिरदय-हिरदय बीच गाँठि अस जोरत लहर चली।

    लहर चली बल खात पाप जारै कै लहर चली,

    धरती के सब ताप-साप टारै कै लहर चली,

    बूड़त बहत अकिंचन उद्धारै कै लहर चली,

    सरन गहे जे बस ओका तारै कै लहर चली।

    देखि भगत के भाव कठौती बीच समानू तू,

    कभी मौज आई तौ सागर अस घहरानू तू,

    सिवसंकर के जटाजूट से भागि परानू तू,

    छोट बड़ा ऊँचनीच कुछ कभौं मानू तू।

    दौरे राजा रंक दौरि के पहुँचे निबल सबल,

    केहू सवारी से दौरा केउ सरकत पेटे बल,

    साधु, महतिमा, ग्यानी, ध्यानी, जोगी, जती, बिकल,

    सबका घोइ माजि चमकावै माई तोहरै जल।

    मुकुत बरे सब जुगुत लगाए परे कलब्बासी,

    एक-एक से धरम धुरंधर स्वामी सन्यासी,

    फहरी धुजा धरम कै सगरौ देखा अक्कासी,

    परग-परग परियाग बनि गवा कदम-कदम कासी।

    दुनिया से तौ बहुत चोराई तोहसी परदा का,

    हमरौ पाप गवा गरुआई तोहसी परदा का,

    जौनी राह चले अब ताई तोहसी परदा का,

    सब जाना तू गंगा माई तोहसी परदा का।

    हमहू आए आस लगाए किरपा कोर करा,

    अपनी एक लहर कै कनखी हमरिउ ओर करा,

    कबसे रातइ रात घिरी बा अब तौ भोर करा,

    हे माई हमरिउ जिनगी मा तनी अँजोर करा।

    स्रोत :
    • पुस्तक : माटी औ महतारी (पृष्ठ 2)
    • रचनाकार : आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'
    • प्रकाशन : अवधी अकादमी

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