तरह-तरह के लोग मिलते हैं दुनिया के इन राहों में
tarah tarah ke log milte hain duniya ke in rahon mein
गीता खाती
Geeta Khati

तरह-तरह के लोग मिलते हैं दुनिया के इन राहों में
tarah tarah ke log milte hain duniya ke in rahon mein
Geeta Khati
गीता खाती
और अधिकगीता खाती
तरह-तरह के लोग मिलते हैं
दो दुनिया इन राहों में
कोई नहीं जानता क्या गूढ़
रहस्य छिपा रहता है, मन के भाव में
अच्छे आदर्श सज्जन भी मिल जाते हैं
जो बिगड़े हुए को भी सुधार देते हैं
दुर्जन भी मिल जाते हैं जो
सज्जन को भी बिगाड़ देते हैं
संभल-संभल के चलना पड़ता है
दुनिया के इन राहों में।
गिरते हुए को उठाने वाले भी मिल जाते हैं
उठते हुए को गिराने वाले भी मिल जाते हैं
दुनिया की इन राहों में
मार्ग दिखाने वाले भी मिल जाते हैं,
मार्ग भटकाने वाले भी मिल जाते हैं
दुनिया की राहों में
तरह-तरह के लोग मिलते हैं, दुनिया की राहों में
कोई नहीं जानता क्या गूढ़ रहस्य छुपा रहता है
इनके मन के भाव में।
- रचनाकार : गीता खाती
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi volutpat porttitor tortor, varius dignissim.
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.