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पूर्वज कवि

purwaj kawi

महेश वर्मा

महेश वर्मा

पूर्वज कवि

महेश वर्मा

पूर्वज कवि आते हैं

और सुधार देते हैं मेरी पंक्तियाँ

मैं कहता हूँ कि हस्ताक्षर कर दें जहाँ

उन्होंने बदला है कोई शब्द या पूरा वाक्य

होंठ टेढ़ा करके व्यंग्य में मुस्काते

वे अनसुनी करते हैं मेरी बात

उनकी हस्तलिपि एक अभ्यस्त हस्तलिपि है

अपने सुंदर दिखने से बेपरवाह

और तपी हुई

कविता की ही आँच में

सुबह मैं ढूँढ़ता उनके पदचिह्न ज़मीन पर

सपनों पर और अपनी कविता पर

फुर्र से एक गौरैय्या उड़ जाती है खिड़की से

स्रोत :
  • पुस्तक : धूल की जगह (पृष्ठ 51)
  • रचनाकार : महेश वर्मा
  • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
  • संस्करण : 2018

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