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लिखा मुझे वृक्षों ने

likha mujhe wrikshon ne

प्रभात त्रिपाठी

प्रभात त्रिपाठी

लिखा मुझे वृक्षों ने

प्रभात त्रिपाठी

लिखा मुझे वृक्षों ने

फुनगियों पर हिलती पत्तियों ने

सड़कों ने, धूल ने

असंख्य कीड़ों-मकोड़ों ने

पक्षियों ने, तितलियों ने

साँपों ने, केंचुओं ने

लिखा मुझे

अतल में सुलगती कामना ने

लाठी लेकर सड़क पार करते

बूढ़े की थकान से लिपटे

वैराग्य ने

लिखा मुझे

धुँधुआती कथा-सी

स्मृति से उभरती

अचानक दिपदिपाती चाहत ने

बारिश के अजीब-ओ-ग़रीब अक्षरों में

लिखा मुझे

एक औरत ने

घोलहे पानी में लिखे

इतिहास-सा अदृश्य

मेरा समय

हर किसी से गढ़े जाने का

कृतज्ञ स्वीकार

लिखा रहेगा

मेरा नहीं होना

शाम की सड़क पर

वृक्ष पर

पहाड़ की ऊँचाई

और पंछियों के परों में

और उन थोड़े से इंसानी घरों में

जहाँ मैं रहा

इस शरीर के धरम से बँधा

फिर उड़ा तो

लिखा

मेरा नहीं होना

उसी निस्सीम नीलाकाश ने

स्रोत :
  • रचनाकार : प्रभात त्रिपाठी
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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