Font by Mehr Nastaliq Web

घूरि जाउ लोमस

ghuri jau lomas

राज

राज

घूरि जाउ लोमस

राज

और अधिकराज

    सत्ते कत्ते-कत्ते बेर पृथ्वी जन्मैए सृष्टिक आदिमे

    जलोदीप भ' मरि जाइए कत्ते बेर

    मुदा काज बेपार मे

    कोनो क्रम छूटै कहाँ छै

    टूटै कहाँ छै

    नै-नै लोमस!

    अहाँ घूरि जाउ असगर

    देखब! धोखो स' अक्षत बीहनि सन तूबय ने अहाँक दर्शनक

    एकोगो आखर

    काहिल अपाहिज आस्थाक एहि कर्म-भूमिपर वैराग

    मुक्तिक बीज-मंत्र नै भ' पाओत कहियो

    पृथ्वी के जहिना नै चाही सिकन्दर

    तहिना नै चाही गोरख बा मछन्दर

    आकि कलंदर सभ दिन पूजल जाएत एत'

    साकार गतिशीलता

    लदि गेलै निष्पंद पाहन पूजाक समय

    छीटल जाइत रहत अक्षत बीहनि

    सृजनक लेल महाविनाशक एगो घड़ीमे

    बाँचि गेल रहय भरथा चिड़ैक दूगो गेल्ह

    मरल हाथीक घंटी तर झाँपल

    चौंतिसक भूकम्पमे खरक छात तर

    मूइल मायक गर्भ स' निकलि बाँचि गेल छल चिल्हका कते

    प्रलयंकर बाढ़िमे मूइल

    भासैत मायक छाती के नाह बना कोनो अनजान दियरिपर

    अररा लागि जाइए कोनो अबोध नेना अपन औंठा चूसैत

    भूख-पियास के परबोधैत

    अहाँक आशंको स' कियो आशंकित किए होअ' लागल लोमस

    कियो पहाड़क शिखर स' कूदि

    आकि गरामे फाँसी लगा आकि द्रव-गोटी खा

    जिनगी किए छोड़' लागल

    घूरि जाउ लोमस! घूरि जाउ गोरख!

    सृष्टिक सदरि गतिशील चक्का

    अहिना उनटैत-पुनटैत रहत

    पृथ्वीक कोखिमे संरक्षित माछ-काछु

    ऊपर आओत

    शुरू हैत फेर

    सृजन विकासक नव सिलसिला।

    स्रोत :
    • पुस्तक : ऐ अकाबोन मे (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 65)
    • रचनाकार : राज
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना
    • संस्करण : 2011

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY