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धुतू-धुतू

dhutu dhutu

आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

और अधिकआद्या प्रसाद 'उन्मत्त'

    नई भीत उठा थै पुरान भीत गिरै भइया धुतू-धुतू,

    हो भइया धुतू-धुतू।

    बरखा कै रतिया गढ़ानि अँधियरिया,

    चारिउ मू से बही झकझोर के बयरिया,

    लूटइ लागे पहरू धरम धन दुइनउ

    हे हो राम लागा तुहीं अब तौ गोहरिया।

    मारा रावनवा मूड़ उतरइ हो भइया धुतू-धुतू,

    हो भइया धुतू-धुतू।

    नकली समाजवाद खोखली अजादी,

    पपवा परदा महतिमा खादी,

    जेकरे रकतवा से बेदिया गै लीपी

    ओकरे असनवा बइठिगे फसादी।

    मारि के ढकेल द्या सोझे उतरइ हो भइया धुतू-धुतू,

    हो भइया धुतू-धुतू।

    डकुआ लुटेरुआ राज तनी देखा,

    झपटै कबुतरी बाज तनी देखा,

    अपुना महलिया करै रँगरेलिया

    देसवा बूड़ा थै जहाज तनी देखा।

    होइ जे मरद लँगोट पहिरइ, हो भइया धुतू-धुतू,

    हो भइया धुतू-धुतू।

    देहियाँ उघारि के करावइ नाच नंगा,

    हँड़वा बहाइ के मचावै हुड़दंगा,

    नवा नवा सपन सुनावइ भिनुसारे

    देसवा लूटि के बनाए भिखमंगा।

    अपुना अखंड खर खाइ चरइ, हो भइया धुतू-धुतू,

    हो भइया धुतू-धुतू।

    नई-नई गीत उठइ नवा खपरइला,

    धरा खटै गोरिया सेंवरिया छैला,

    ठुमठुम ठुमकै मारै किलकारी

    अंगना ललना, बगिचवा मुरैला।

    खेतवा कियरिया बसंत लहरइ, हो भइया धुतू-धुतू,

    हो भइया धुतू-धुतू।

    चँदा मामा धावइँ लिहे दूध कइ कटोरिया,

    हँसिके अँगनवा उतरइ अँजोरिया,

    सास जी छोहिया ननद कइ ठिठोली

    अपने लिलार पे गुमान करइ गोरिया।

    फिर से धरतिया सरग उतरइ, हो भइया धुतू-धुतू,

    हो भइया धुतू-धुतू।

    अँखिया भइ निंदिया भुखिया भै दाना,

    लजिया भै कपड़ा सरब सुख माना,

    अवा गवा देखि के जुड़ाइ जाइ छतिया

    केहू कै दरद दुख रहै बेगाना।

    गोरुआ कि नाईं केउ अपुनइ चरइ, हो भइया धुतू-धुत,

    हो भइया धुतू-धुतू।

    अँखिया पनिया मना चिनगारी,

    निकरा पुरुब से पुरुष अवतारी,

    दौरि चला गाँव-गाँव टेरा थै जवानी,

    जेका होइ दुधवा पियाए महतारी।

    दुधव कइ लाज करइ दौरि के भिरइ, हो भइया धुतू-धुतू,

    हो भइया धुतू-धुतू।

    नई भीत उठा थै पुरान भीत गिरै भइया धुतू-धुतू,

    हो भइया धुतू-धुतू।

    स्रोत :
    • पुस्तक : माटी औ महतारी (पृष्ठ 56)
    • रचनाकार : आद्या प्रसाद 'उन्मत्त'
    • प्रकाशन : अवधी अकादमी

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