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भारतीय का ईश्वर

bharatiy ka iishvar

विलियम बटलर येट्स

विलियम बटलर येट्स

भारतीय का ईश्वर

विलियम बटलर येट्स

और अधिकविलियम बटलर येट्स


     
    सघन द्रुमावलि की छाया में सरिता के तीरे-तीरे
    चला जा रहा था घुटने तक घासों में धीरे-धीरे।
    संध्या की लाली के अंदर था ऐसा मस्तानापन,
    झपकी, सुधियों की थपकी में हल्कोरे लेता था मन।
    मैंने देखा जल से कुछ जल-पंछी थल पर चढ़ आए,
    पानी की बूँदें छिटकाते सबने डैनें फड़काए।
    चक्कर देते एक दूसरे के पीछे कुछ काल रहे,
    तब उनमें से सबसे बूढ़े ने रुककर ये शब्द कहे,
    जिसके चंचु-पुटों के अंदर सारा विश्व समाया है,
    निबल किसी को, सबल किसी को जिसने स्वयं बनाया है,
    वह है एक अमर जल-पंछी, उसका अंबर पार भवन,
    उसके डैनों की झड़ वर्षा, नयनों की द्युति चंद्र-किरण।
    और बढ़ा तो मैंने देखा बोल रहा है एक कमल,
    जो जग-स्रष्टा और नियंता, एक वृत पर है अविचल;
    मैं उसके अनुरूप बना हूँ; सागर के ज्वारों की चाल,
    उसकी एक बूँद की सिहरन; उसका घर, पंखुरी विशाल।
    कुछ दूरी पर अँधकार में खड़ा हुआ था एक हिरन,
    उसकी आँखों में थी तारों के उजियाले की थिरकन;
    बोला, वह नभ-विचरणकारी है कोई मृग करुणामय,
    नहीं, बनाता मुझको कैसे इतना कोमल, करुण-हृदय?
    मैं कुछ आगे बढ़ा कि सहसा एक मोर ने शोर किया,
    भू पर जिसने घास बिछाई, कृमि-कीटों को जन्म दिया,
    जिसने मेरे पंख सँवारे वह है एक मयूर विराट,
    धीरे-धीरे पंख घुमाकर नाचा करता सारी रात,
    जिससे जगमग करती रहती तारों की पाँतों पर पाँत।
    स्रोत :
    • पुस्तक : मरकत द्वीप का स्वर (पृष्ठ 18)
    • रचनाकार : विलियम बटलर येट्स
    • प्रकाशन : राजपाल एंड संस
    • संस्करण : 1965
    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    ‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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