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अनाम फूल के नाम

anam phool ke naam

मनोज शर्मा

मनोज शर्मा

अनाम फूल के नाम

मनोज शर्मा

एक नया फूल खिलेगा

कि खिलेगा चौतरफ़ा

अंबर खिलेगा, खिलेगा प्रकाश, हवा भी खिलेगी

खिलेंगी उमंगें, नींद खिलेगी, भूख भी तो खिलेगी

और धमनियों में खिल-खिल जाता रक्त गुनगुनाएगा...

घड़ी तो अपनी चाल में होगी

कि टिकटिक की आवाज़ बदल जाएगी

उस रात छपते अख़बार

बस अनाम फूल का नाम छापेंगे

फ़ौजियों की क़दमताल यूँ लगेगी

जैसे घर बाँहें पसारे खड़ा हो

दरख़्त गीत गाएँगे

गूँगे, गुनगुनाएँगे

दौड़ में भाग लेंगे, लँगड़े

बूढ़े, साइकिल भगाएँगे

जब खिलेगा फूल, अनाम

सौंदर्य में पहली बार राग फूटेगा

यकायक, सन्नाटा उम्मीद से भर जाएगा

डायरी के ख़ाली पन्नों पर

'ख़ुशी' लिखी मिलेगी

हलवाई नई मिठाइयाँ ईजाद करेंगे

औरतें शृंगार में रम-रम जाएँगी

पतंग उड़ाते बच्चे, छतों से देर तक उतरेंगे

गायें, पहले से अधिक दूध देंगी

रात बहुत पहले ही

भोर में बदल जाएगी

तो आएँ

उस अनाम से कहें :

आपके इंतज़ार में हैं दिशाएँ...

जैसे धरती, देवता

जैसे पिता इंतज़ार में हैं

जैसे स्याही में शेष बचीं

तमाम कविताएँ!

स्रोत :
  • रचनाकार : मनोज शर्मा
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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