लाख ना करोड़ आँखि में सजल बा एकता
laakh na karoD ankhi mein sajal ba ekta
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
लाख ना करोड़ आँखि में सजल बा एकता
laakh na karoD ankhi mein sajal ba ekta
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
लाख ना करोड़ आँखि में सजल बा एकता!
हार फूल के सुगंध से भरल बा एकता!!
एक डार पर हजार पंछियन के गोल बा
मेल-जोल-बोल से चहक उठल बा एकता!!
जात-धरम-भासा के बटखरा के फेंक दीं
आदमी कहाँ बा तउल लीं धरल बा एकता!!
तुलसी-एकबाल-संत कबिरा के भारत में
प्रेम रीत गीरत से रचल-बसल बा एकता!!
आपसी विरोध खाली आग ना बरुद ह
देस ऊँ कहाँ रहल जहाँ मरल बा एकता!!
एकता के जोत से अंधार में अँजोर बा
देस गाँव हर गली, दीआ बरल बा एकता!!
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 25)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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