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काल के मस्तक

kaal ke mastak

क्षितिज

क्षितिज

काल के मस्तक

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    काल के मस्तक पे अंकित

    पुण्य क्या है? पाप क्या है?

    भावनाओं की गणित में

    बोध का परिमाप क्या है?

    कंठ से निकले हुए हर शब्द का आकार अपना

    क्या करूँ अपना समर्थन क्या करूँ प्रतिकार अपना

    सबको अपनी कर्म निधि का मोल मिलता है जगत् में

    सूर्य का अपना है शासन, चाँद का अधिकार अपना

    सब प्रदर्शन कर रहे हैं अपने अपने धर्म पथ पर

    क्या लिखूँ अपराध दिन का?

    रात का संताप क्या है?

    काल के मस्तक पे अंकित...

    कर्म क्या है? सत्य के भावों को समुचित अर्थ देना

    सत्य क्या है? जो भी जैसा है उसे स्वीकार कर लूँ

    धर्म क्या है? सत्य पथ पर अग्नि मंथन प्राण का है

    मोक्ष क्या है? प्राण की नौका पे जीवन पार लूँ

    सृष्टि के सागर में ये मानव युगों से खोजता है

    इस जगत् में आहुति का

    मंत्र क्या है? जाप क्या है?

    यज्ञ में समभाव+ना के भावनाएँ होम कर के

    और फिर उसमें विलय अस्तित्व का हर रोम कर के

    इक वही निर्माण के प्रारम्भ हैं, और अंत भी हैं

    सारे स्वर, अक्षर, कलाएँ, प्रार्थनाएँ ओम् कर के

    आदि वीणा के सभी तारों को झंकृत कर रहा हूँ,

    भाल पर लिखा हुआ

    प्रारब्ध का आलाप क्या है?

    काल के मस्तक पे अंकित…

    स्रोत :
    • रचनाकार : क्षितिज
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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