चर्यापद

सहज सिद्धों द्वारा 'संधा' या 'संध्या' भाषा में कहे गए उपदेशात्मक पद। 'चर्या' का संबंध आचरण से है। मनुष्य के व्यवहार में आचरणीय कर्मों का वर्णन और उपदेश चर्यापद के मूल में है।

समय : 10वीं सदी। चर्पटीनाथ के शिष्य और बौद्ध धर्म की वज्रयान शाखा के महत्त्वपूर्ण कवि।

सिद्ध कवि। समय : 840 ई. के आस-पास। पौराणिक रूढ़ियों और उनमें फैले भ्रमों के विरुद्ध।

वज्रयानी सिद्ध। तंत्रसाधक। जातिवाद के विरोधी और सहज साधना के प्रबल समर्थक। चौरासी सिद्धों में से एक।

मगध नरेश। विरूपा के शिष्य। तंत्र-साधक और वज्रयानी। चौरासी सिद्धों में महत्त्वपूर्ण नाम।

समय : 8वीं सदी। राजा धर्मपाल के समकालीन और शबरपा के शिष्य। चौरासी सिद्धों में महत्त्वपूर्ण। जातिवाद और आडंबर के विरोधी।

समय : 11-12वीं सदी। वज्रयानी सिद्ध, तंत्रयोगी और चौरासी सिद्धों में समादृत कवि।

आदि कवि। जन्म : 780 ई. के आस-पास। सरहपा के शिष्य। माया-मोह के विरोधी और सहज जीवन के साधक।