मेरठ के रचनाकार

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शब्द-शोध और उसके विस्तार के लिए समादृत व्यक्तित्व। कमलेश्वर के शब्दों में—शब्दाचार्य। अपनी पत्नी कुसुम कुमार के साथ हिंदी के प्रथम समांतर कोश (थिसॉरस) के निर्माण के लिए लोकप्रिय।

प्रतिष्ठित कथाकार। अपनी बहुआयामी भाषा के लिए लोकप्रिय। पत्र-पत्रिकाओं के संपादन से भी जुड़ाव।

आधुनिक काल की आरंभिक गद्यकार।

नई पीढ़ी के श्रेष्ठ कवि-कथाकार। सिनेमा के संसार से भी संबद्ध।

भारत के इतिहास, संस्कृति, कला एवं साहित्य के अधिकारी विद्वान। साहित्य अकादमी से पुरस्कृत।

सुपरिचित कवि-लेखक और संपादक। दस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित।

‘राम की जल समाधि’ शीर्षक रचना के सुविख्यात गीतकार।

सुपरिचित कवि-लेखक। दलित-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक।

जश्न-ए-रेख़्ता (2023) उर्दू भाषा का सबसे बड़ा उत्सव।

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