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महेश कटारे

1948 | ग्वालियर, मध्य प्रदेश

समादृत कथाकार। गद्य की कई विधाओं में सृजनरत। कई पुस्तकें प्रकाशित।

समादृत कथाकार। गद्य की कई विधाओं में सृजनरत। कई पुस्तकें प्रकाशित।

महेश कटारे का परिचय

समादृत कथाकार महेश कटारे का जन्म 14 जनवरी 1948 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर ज़िले के बिल्हैटी नामक गाँव में हुआ। गद्य की कई विधाओं में सक्रिय महेश कटारे ने कहानियाँ, उपन्यास, यात्रावृत्तांत नाटक और आलोचना लिखी है। तमाम पत्र-पत्रिकाओं में उनका लिखा प्रकाशित होता रहता है। 

कृतियाँ :- 'समर शेष है', 'इतिकथा अथकथा', 'मुर्दा स्थगित', 'पहरुआ', 'छछिया भर छाछ', 'सात पान की हमेल', 'मेरी प्रिय कथाएँ', 'गौरतलब कहानियाँ' 'महासमर का साक्षी', 'अँधेरे युगांत के', 'पचरंगी पहियों पर रात दिन', 'देस बिदेस दरवेश', 'कामिनी काय कांतारे', 'कालीधार', 'समय के साथ-साथ', 'नज़र इधर-उधर'।

महेश कटारे अपने लेखन में लोक की आवाज़ उठाते रहे हैं। अध्यापन और लेखन करते हुए वह खेती-किसानी में सक्रिय रहे। उन्होंने संस्कृत के कई आचार्यों पर उपन्यास लिखे हैं। अपने साहित्यिक अवदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनेक सम्मान व पुरस्कारों से पुरस्कृत हैं।

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